नोएडा/ग्रेटर नोएडा (दिल्ली-एनसीआर):
जब देश का युवा वर्ग तेज़ मुनाफ़े वाली नौकरियों की ओर बढ़ रहा है, उसी समय दिल्ली-एनसीआर के दो युवाओ ने मोहित भाटी और आकाश राठौर ने खेती को अपने सपनों का माध्यम बनाया। उन्होंने AgriTech Organics के माध्यम से जैविक खेती की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल की, जिसकी शुरुआत उन्होंने वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) से की।
वर्मीकम्पोस्ट से जैविक भविष्य की नींव
मोहित भाटी और आकाश राठौर ने रासायनिक खादों से हो रहे मिट्टी, जल और स्वास्थ्य के नुकसान को देखते हुए जैविक खेती को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने सबसे पहले वर्मीकम्पोस्ट यूनिट की स्थापना की, जहाँ प्राकृतिक तरीके से केंचुओं की सहायता से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाती है।
यह वर्मीकम्पोस्ट आज दिल्ली-एनसीआर के किसानों, गार्डनर्स, नर्सरी संचालकों और शहरी बागवानी प्रेमियों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है।

AgriTech Organics: ‘प्रकृति से प्रगति तक’
AgriTech Organics केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। इस ब्रांड का उद्देश्य है—
मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करना
किसानों की लागत घटाना
रासायनिक खेती से मुक्ति दिलाना
उपभोक्ताओं को सुरक्षित और शुद्ध भोजन उपलब्ध कराना
आज AgriTech Organics वर्मीकम्पोस्ट के साथ-साथ अन्य जैविक इनपुट्स पर भी काम कर रही है और किसानों को प्रशिक्षण व जागरूकता भी प्रदान कर रही है।

👨🌾 किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा
मोहित भाटी और आकाश राठौर की यह पहल उन युवाओं के लिए एक मिसाल है जो खेती को घाटे का सौदा मानते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि सही तकनीक, ज्ञान और ईमानदारी से जैविक खेती एक सफल और सम्मानजनक व्यवसाय बन सकती है।

🌍 पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम
AgriTech Organics का मॉडल पर्यावरण के अनुकूल है। इससे न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है बल्कि जल संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलता है।

✨ भविष्य की योजनाएँ
आने वाले समय में AgriTech Organics—
मल्टी-प्रोडक्ट ऑर्गेनिक इनपुट यूनिट
जैविक खेती प्रशिक्षण केंद्र
अर्बन गार्डनिंग किट
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर में जैविक जागरूकता
की दिशा में आगे बढ़ रही है।

📰 निष्कर्ष
दिल्ली-एनसीआर में AgriTech Organics और मोहित भाटी और आकाश राठौर की यह पहल बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो खेती भी स्टार्टअप बन सकती है। यह कहानी न केवल किसानों बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है—जहाँ प्रकृति से जुड़कर प्रगति की जा सकती है।


